क्या बच्चे पैदा करना ज़रूरी है?

प्रश्न: क्या बच्चे पैदा करना ज़रूरी है?

आचार्य प्रशांत: बच्चा माने क्या होता है? एक घर है, उस घर के लिए बच्चे के का क्या अर्थ है? परिवार में बच्चे का क्या मायना है?

प्रश्नकर्ता: वंश आगे बढ़ाने के लिए बच्चे का होना ज़रूरी है — ऐसा लोग कहते हैं।

आचार्य प्रशांत: तुम्हारे लिए बच्चे का अर्थ क्या है? घर में बच्चा क्यों चाहिए?

प्रश्नकर्ता: घर में खुशी के लिए।

आचार्य प्रशांत: तो ले आओ बच्चा। अगर बच्चे से खुशी मिलती है, तो क्या ज़रूरी है कि वो तुम्हारे ही गर्भ से निकले? ले आओ बच्चा।

प्रश्नकर्ता: ऐसा हम सोचते हैं। ज़रूरी नहीं है कि पति भी ऐसा ही सोचें।

आचार्य प्रशांत: तो उनसे पूछो न कि -“तुम्हें चाहिए क्या है?”

प्रश्नकर्ता: उनका कहना है कि बच्चा ‘अपना’ होना चाहिए। फ़िर ऐसी बातों पर झगड़ा भी होता है।

आचार्य प्रशांत: हम क्या ये सवाल नं पूछें कि — “अपना बच्चा इतना ज़रूरी क्यों है?”

प्रश्नकर्ता: मेरे लिए ‘अपना’ बच्चा होना ज़रूरी नहीं है, लेकिन बच्चा होना चाहिए।

आचार्य प्रशांत: बात ये नहीं है कि बच्चा ज़रूरी है या नहीं । बात ये है कि — यदि है ज़रूरी तो क्यों है? और अगर ये भी कह रहे हो कि — “नहीं है ज़रूरी,” तो क्यों नहीं है? सवाल पूछा जाना चाहिए या नहीं? कि -“हम हैं, तुम हो और इस रिश्ते में बच्चे की जगह क्या है?”

क्या हम करुणा से इतने भरे हुए हैं कि हमें छोटू चाहिए गोद में? ऐसा हमारी ज़िंदगी देखकर तो लगता नहीं है कि हम करुणा से ओतप्रोत हैं। कुत्ते के पिल्ले को तो मारकर भगा देते हैं, और खुद कह रहे हैं कि -“बच्चा नहीं आया तो जीवन में हमारा वात्सल्य भाव कैसे प्रकट होगा?” हम क्यों चाहते हैं बच्चा? और ये पूछना खतरनाक है क्योंकि हम नहीं जानते कि हम क्यों चाहते हैं बच्चा। हम सिर्फ़ इसीलिए चाहते हैं क्योंकि सबके पास बच्चा है।

जैसे एक बच्चा बोले, “उनके पास भी है गुब्बारा, उनके पास भी है गुब्बारा, मम्मी मुझे भी गुब्बारा दिलाओ न।” और पूछो , गुब्बारा चाहिए क्यों?” तो उनके पास कोई जवाब नहीं होगा।

हम ज़रा भी जागरुक लोग नहीं हैं। हमें बिलकुल समझ में नहीं आ रहा है कि इस समय दुनिया की हालत क्या है। दुनिया एक भी नए बच्चे का बोझ बर्दाश्त नहीं कर सकती।

और ये आध्यात्मिक नहीं, वैज्ञानिक, इकोलॉजिकल (पारिस्थितिक) बात बोल रहा हूँ मैं। तुम बच्चा पैदा कर देते हो, बच्चे के साथ-साथ रोड भी पैदा करोगे, मकान भी पैदा करोगे, हवा भी पैदा करोगे, पानी भी पैदा करोगे, अन्न भी पैदा…

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org