क्या प्रकृति हिंसा से भरी हुई है? मनुष्य के लिए माँसाहार उचित है?

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, ईश्वर को करुणा का सागर कहा गया है, परंतु दुनिया में हर तरफ़ हिंसा ही दिखाई देती है। जीवों की रचना में एक ओर तो हिरण है और दूसरी ओर शेर है। हिरण मासूम है फिर भी शेर उसे बहुत बुरी तरह मारकर खा जाता है। हिरण है तो रचना तो सुंदर है परंतु शेर जैसा हिंसक जानवर देखकर उसकी सुंदरता और करुणा समझ नहीं आती। कृपा मार्ग दर्शन करें।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org