क्या त्यागा था बुद्ध ने? दुनिया ऐसी क्यों?

ये बात मन को सुहाती है कि
दुकान में ही बैठे-बैठे आध्यात्मिक हो जाओ!

आदमी को बड़ा अच्छा लगता है,
चलो दुकान बची!
बाकी सब संत-महात्मा तो बता गए हैं
त्याग और साधना करनी पड़ेगी

और कोई आए और बता दे कि
नहीं-नहीं कुछ छोड़ना नहीं पड़ेगा
“जो कर रहे हो, वही करते रहो
कोई भी धंधा…

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org