कैसे लोगों की दोस्ती मेरे लिए अच्छी?

हम सब ये चाहते हैं की निर्दोष रहें। तो ऐसे में वो स्तिथि हम सबको सुहाती है जिसमें हमे ये एहसास हो कि हम में कोई खोट नहीं, हम में कोई दोष नहीं, क्योंकि निर्दोषिता सवभाव है ना। ऐसा मौहौल जो तुम्हें ये एहसास करा दे, थोड़ी ही देर को सही, भ्रम रूप में ही सही कि तुम पूरे हो, तुम बढ़िया हो, तुम पूर्ण हो, परफेक्ट हो, तुम में कोई दोष नहीं, वो तुम्हें हमेशा अच्छा लगेगा।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org