कैद में हो, जूझ जाओ!

कसाई के पिंजड़े देखे हैं न? उसमें कुक्कड़ मुर्गा और गुटरी मुर्गी बैठकर चर्चा कर रहे हैं कि, “महाराष्ट्र का हाल भी कर्नाटक जैसा होगा?” और थोड़ी ही देर पहले उन्होंने देखा है कि पिंजड़े में एक हाथ भीतर आया था, एक को उठाया था, वहाँ ले जाकर के पत्थर पर रखा था, और खच!

या वो मुर्गा-मुर्गी बैठकर के कहें कि, “माता का व्रत रखते हैं”। क्या होगा रे? “आरती गाते हैं।” क्या? वहाँ अंदर एक ज्योतिषी भी है। वो कहता है मैं पंजे देखता हूँ। वो…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org