कृष्ण की बात हम समझ क्यों नहीं पाते?

न त्वेवाहं जातु नासं न त्वं नेमे जनाधिपा |
न चैव न भविष्याम: सर्वे वयमत: परम् || २, १२ ||

न तो ऐसा ही है कि मैं किसी काल में नहीं था, तू नहीं था अथवा ये राजा लोग नहीं थे और न ही ऐसा है कि इससे आगे हम सब नहीं रहेंगे।
—श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय २, श्लोक १२

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कृष्ण की भाँति क्या हम सब भी ये महसूस कर सकेंगे कि हम भी अस्तित्व में पहले भी थे और बाद में भी होंगे?

आचार्य प्रशांत: आप श्रीकृष्ण हैं तो महसूस कर सकेंगे और अगर आप श्रीकृष्ण नहीं हैं तो नहीं…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org