कृष्ण-कामना और इन्द्रिय-संयम!

कृष्ण-कामना और इन्द्रिय-संयम!

तस्मात्त्वमिन्द्रियाण्यादौ नियम्य भरतर्षभ । पाप्मानं प्रजहि ह्येनं ज्ञानविज्ञाननाशनम् ।।४१।।

हे भरतवंशश्रेष्ठ अर्जुन! इसलिए इंद्रियों को संयत करके ज्ञान-विज्ञान का नाशक ये जो पापरूपी काम है, इसका परित्याग करो।

~ श्रीमद्भगवद्गीता, अध्याय ३, श्लोक ४१

आचार्य प्रशांत: इकतालीसवें श्लोक में कह रहे हैं कि ‘अर्जुन, इसीलिए इंद्रियों को संयत करके, जो ज्ञान-विज्ञान का…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org