कुविचार और सुविचार में अंतर कैसे करें?

जिसको हम सुविचार कहते हैं और जो कुविचार होता है, दोनों में एक मौलिक अंतर होता है। अंतर ये है कि कुविचार, विचारक को बचाने के लिए होता है। कुविचार वो, जिसकी चेष्टा है कि विचारक बचा रहे।

जो विचार बार-बार आता हो और आगे ना बढ़ पाता हो उसमें किसी तरीके की ऊँचाई, बेहतरी ना आ पाती हो उसी विचार को जान लीजिएगा कि वो कुविचार है। सुविचार की पहचान ये होगी कि वो क्रमशः क्षीण पड़ता जाएगा। कुविचार का काम है बने…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org