कुछ लोग राष्ट्रवाद को बुरा क्यों मानते हैं?

राष्ट्र के केंद्र में हमेशा एक साझी पहचान होती है, वो साझी पहचान आमतौर पर क्या हो जाती है? पंथ, मज़हब, बोली, खानपान, आचरण, ये सब हो जाती है न? या जातीयता। राष्ट्र के केंद्र पर जो साझी पहचान होती है, शेयर्ड आइडेंटिटी, वो आमतौर पर ये हो जाती है — इसीलिए राष्ट्रवाद गड़बड़ चीज़ है। लेकिन एक अलग तरह का राष्ट्रवाद भी हो सकता है, जब एक जनसमुदाय बोले कि हम एकसे इसीलिए हैं क्योंकि हमें सच्चाई पर चलना है। वो भी एक राष्ट्र ही…

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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