किस बात पर ध्यान देता है मन?

हर चीज़ को नहीं अंकित करता मन। इतनी सामर्थ्य ही नहीं है मन की कि हर घटना, हर संवेग उस पर चिन्हित हो जाए। मन अहम् का गुलाम होता है। अहम् ने अपनी जो पहचान तैय करी होती है मन उसी के अनुसार काम करता है।

तुमने जो कुछ भी अपना नाम पता अपने आप को बता रखा है, तुम्हारे मन पर उसी के अनुसार घटनाएं और प्रभाव अंकित होते हैं। सब कुछ नहीं मन पर आता, जो तुम्हारा नाम होता है मन उसी के अनुसार दुनिया से प्रभाव ग्रहण करने लगता है। और मन दुनिया से जो कुछ ले रहा होता है मन के अनुसार दुनिया बस वैसी ही होती है।

अलग-अलग लोगों के संसार इसीलिए अलग-अलग होते हैं क्योंकि अलग-अलग लोगों ने अपने नाम पते अलग-अलग तय कर रखे होते हैं। जो तुम्हारा नाम है वैसा तुम्हारा संसार है। नाम बदल दो। इधर-ऊधर के, व्यर्थ के फुटकर प्रभाव मन पर छपना बिल्कुल बंद हो जायेंगे।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org