किसको मूल्य दे रहे हो?

नाम राम को अंक है, सब साधन है सून।

अंक गए कुछ हाथ नहिं, अंक रहे दस गून।।

~ संत तुलसीदास

आचार्य प्रशांत: तुमने अपनी ज़िंदगी में जो इकट्ठा किया है, सब ‘सून’ है। अब सून को सूना मानो चाहे शून्य मानो — असल में दोनों एक ही धातु से निकलते हैं। जिसे तुम कहते हो न ‘सूनापन’, वो शून्य से ही आता है। तुमने ज़िंदगी में जो कुछ इकट्ठा किया है, वो सून है, वो शून्य है। वो तुम्हें सूनापन ही…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org