किसको गुरु मानें?

ये कितना अश्लील तरीका है कहने का कि ‘मैं गुरु बनाऊंगा’, यह करीब-करीब वैसी ही बात है कि ‘मैं ब्रह्म बनाऊंगा’। आप करोगे क्या गुरु का? गुरु आपकी क्या है? कामवाली है? टैक्सी करी जाती है ऐसे गुरु कर रहें हैं? पर यही होता है, जैसे दुकानों में जाकर आप अन्य चीज़ें करते हो, ख़रीदते हो वैसे ही आजकल गुरु-शौपिंग हो रही है — एक दुकान, दो दुकान­­, ‘मैंने ख़रीदा है!’

अंततः आप उसी को गुरु बनाते हो, जैसे आप होते हो, जैसे आप हो वैसे किसी को पकड़ लाओगे।…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org