किनसे प्रभावित हों? कौन हों आपके आदर्श?

किनसे प्रभावित हों? कौन हों आपके आदर्श?

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, कैसे जानें कि किससे प्रभावित होना है और किससे नहीं होना है? कैसे पता करें कि कोई व्यक्ति हमारा आदर्श बनने लायक है या नहीं?

आचार्य प्रशांत: प्रभावित होने का क्या अर्थ है? प्रभावित होने का अर्थ है कि हम एक स्थिति में हैं, मन हमारा एक स्थिति में है और कोई बाहर से आकर के उसको उस स्थिति से हिला-डुला रहा है, उसको उस स्थिति से हटा रहा है। हमारी स्थिति पर कोई बाहर वाला प्रभाव डाल रहा है। उसके संपर्क में आने के बाद हम वैसे ही नहीं रह जाएँगे जैसे कि हम पहले थे, उसके संपर्क में आने से पहले। हमारी स्थिति बदल रही है किसी के प्रभाव क्षेत्र में आकर के। इसको कहते हैं प्रभावित होना।

तो स्थिति बदल रही है मन की। कोई आया ज़िन्दगी में, तुमने किसी की बात सुनी, किसी को देखा, किसी की संगति करी और उसके कारण तुम्हारी ज़िन्दगी, तुम्हारे मन की स्तिथि बदली।

पर किधर को बदली? तुम्हारा मन पहले से बेहतर हुआ या तुम्हारा मन पहले से बदतर हुआ? किसी का प्रभाव तुम पर पड़े तो यही दोनों विकल्प हो सकते हैं न, कि उसकी संगति में आने के कारण या तो तुम पहले से बेहतर मन और इंसान हो गए या उसकी संगति में आने के कारण तुम और बदतर हो गए।

अब बेहतर और बदतर होने का अर्थ क्या है, इसको भी समझते हैं। हम सभी बेहतरी अपनी चाहते हैं न? हमारी बेहतरी की परिभाषाएँ अलग-अलग होंगी लेकिन सब परिभाषाओं में कहीं-न-कहीं एक शब्द तुमको मिल जाएगा — ऊँचाई या शांति। अगर आपकी ज़िन्दगी में जो परिवर्तन आ रहे हैं वो परिवर्तन आपको अशांत करे दे रहे हैं या उन…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org