कालातीत योग और समकालीन चुनौतियाँ

योग के सामने कोई चुनौतियाँ नहीं होती। योग तो मन की सहायता हेतु है। मन चुनौतियों से घिरा हुआ है, मन की सहायता के लिए योग है।

आपने कहा, “समकालीन चुनौतियाँ,” काल ही मन के लिए होता है। काल के अनुसार मन के सामने चुनौतियाँ बदलती जाती हैं। अलग-अलग समय में मन के लिए अलग-अलग तरह के विक्षेप होते हैं, राग होते हैं, द्वेष होते हैं, समस्याएँ होती हैं।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org