काबिल-ए-तारीफ़ मैं तुम्हें चाहता हूँ

मेरी तारीफ़ से ग़मगीन न करो मुझे,
काबिल-ए-तारीफ़ मैं तुम्हें चाहता हूँ।

~ आचार्य प्रशांत

तुम बोलोगे, “आचार्य जी महान हैं,” आचार्य जी क्या हैं, ये वो जानते हैं कि तुम जानते हो? मैं जानता हूँ न मैं क्या हूँ, तुम मेरे ही बारे में मुझे कुछ बताना चाहते हो? “आचार्य जी महान हैं!” अगर तुम ये बोल सकते हो आचार्य जी महान हैं, तो तुम कल ये भी बोल सकते हो कि आचार्य जी लफंगे हैं, मुझे वो भी…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org