कर्म और निःस्वार्थ भाव

जो व्यक्ति दफ्तर में कुछ नहीं करता
यदि उससे उसे दो पैसे का
लाभ न हो रहा हो,
तो वो घर में भी कुछ नहीं करेगा
यदि उससे उसे लाभ न हो रहा हो।

क्योंकि उसके मन को पूरे तरीके से
लाभ के लिए ही संस्कारित
कर दिया गया है।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org