करीब आने का क्या अर्थ है?

अहंकार को आश्वस्ति कभी नहीं होती और अहंकार से ज़्यादा आश्वस्त कोई होना नहीं चाहता।

अहंकार लगातार तरीके खोजता है किसी बात को तय कर लेने के, पक्का कर लेने के। बात जितनी तय होती है, अहंकार को एक छोर पर बड़ा सुकून मिलता है कि बात ठीक है, “मैं कुछ जान गया। मैं शांत हो सकता हूँ। मैं चैन से सो सकता हूँ।” लेकिन जितनी आश्वस्ति बढ़ती जाती है, अहंकार का खौफ भी उतना ही बढ़ता जाता है। जैसे कि तुम किसी टूटे हुए कटोरे में पानी भरने की…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org