‘कण-कण में भगवान्’ का असली अर्थ क्या है?

अध्यात्म में इस मुहावरे का बहुत उपयोग किया जाता है कि कण-कण में, लोगों में भगवान को देखो। इसका क्या मतलब है या ये सिर्फ बोलने की बात है?

लोगों में भगवान को देखने का अर्थ है लोगों को भगवत्ता के केंद्र से देखो। लोग तुम्हें वैसे ही दिखाई देंगे जैसे तुम हो। एक गाय चली आ रही है तुम बछड़े हो तुम्हें क्या दिखाई देगा — माँ।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org