ऐसा घर जहाँ राम धुन लगातार बजती ही रहती है

तीन तरह के लोग हुए, तीन तरह के मन हुए: एक वो, वो पढ़ते भी हैं तो भी पढ़ने के दरमियान भी भज नहीं पाते। आँखें पढ़ रही हैं, आँखें शब्दों को, दृश्यों को, चित्रों को देख रही हैं, मन उनका अनुवाद कर रहा है और बस इतना ही हो रहा है। ९५% लोग, ९५% समय ऐसे ही पढ़ते हैं, आँखों से और मन से। आँखों ने शब्द को देखा, शब्द एक चित्र है, आँखों ने शब्द को देखा, मन ने उसका अपनी परिचित भाषा में अनुवाद कर दिया और बात खत्म हो गयी। बुद्धि ने आकर…

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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