एक विशेष प्रकार का चिंतन है अध्यात्म

मन जैविक रूप से और सामाजिक रूप से संस्कारित होता है दुनिया भर का चिंतन करने के लिए, कुछ भी नहीं है ऐसा मन के पास जो मन को प्रेरित करे अपने भीतर जाने के लिए। मन के पास कोई कारण नहीं है कि वो अपना विषय स्वयं को ही बना ले। पूरा विश्व मन का विषय है और यही मन की प्राकृतिक वृत्ति होती है। मन के पास कोई प्रेरणा, कोई कारण नहीं होता, कोई वजह नहीं होती कि मन अपने भीतर जाए और पूछे ये सोच क्या चीज़ होती है? क्या विचार स्वयं के बारे में…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org