एक और आख़िरी मौक़ा

एक और आख़िरी मौक़ा

दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार। तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार।। ~कबीर साहब

प्रश्नकर्ता: संसार में मनुष्य जन्म मुश्किल से मिलता है। यह मानव शरीर उसी तरह बार-बार नहीं मिलता जैसे वृक्ष से पत्ता झड़ जाए तो दोबारा डाल पर नहीं लगता। तो क्या मनुष्य शरीर बार-बार जन्म लेता है?

आचार्य प्रशांत: कबीर इतना ही तो कह रहे हैं कि:

--

--

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org