ऊपर से नर, अंदर से पशु

शिक्षा के नाम पर हमको रोज़गार के साधन बता दिए जाते हैं। शिक्षा के नाम पर तुम्हें क्या दे दिया जाता है -

“वकील बन जाओ!”

“इंजीनियर बन जाओ!”

“डॉक्टर बन जाओ!”

ये सब क्या हैं? ये तो रोज़गार के धंधे हैं, शिक्षा कहाँ है इसमें!

शिक्षा कहाँ मिली है अभी तक, इंसान कहाँ बने? पशु को धंधा करना सिखाया जा रहा है, ये हमारी शिक्षा व्यवस्था

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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