उसके लिए प्राण भी जाएँ, तो कोई बात नहीं

कथा: पम्पा सरोवर में नहाते समय राम और लक्ष्मण ने सरोवर के तट की मिट्टी में धनुष गाड़ दिए। स्नान करके लक्ष्मण ने धनुष निकलते हुए देखा, धनुष में ख़ून लगा हुआ था। राम ने देखकर कहा, “भाई, जान पड़ता है कि कोई जीव पर हिंसा हो गई है!” लक्ष्मण ने मिट्टी खोदकर देखा तो एक बड़ा मेंढक था, वह मरणासन्न हो गया था। राम ने करुणापूर्वक कहा, “तुमने आवाज़ क्यों नहीं दी? हम लोग तुम्हें बचा लेते। जब साँप पकड़ता है, तब तो ख़ूब चिल्लाते हो।” तो…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org