उसके बिना तड़पते ही रहोगे

उसके बिना तड़पते ही रहोगे

राम बिनु तन को ताप न जाई

जल में अगन रही अधिकाई

राम बिनु तन को ताप न जाई

तुम जलनिधि में जलकर मीना

जल में रहि जलहि बिनु जीना

राम बिनु तन को ताप न जाई

तुम पिंजरा मैं सुवना तोरा

दरसन देहु भाग बड़ मोरा

--

--

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org