उलझे सम्बन्धों को कैसे सुलझाएँ?

उलझे सम्बन्धों को कैसे सुलझाएँ?

प्रश्न: क्या सम्बन्ध इनके अलावा भी होते हैं — शरीर, विचार, गुरु?

वक्ता: अभी मैं अगर बताऊँगा भी, तो वो वैचारिक ही हो जाएगा ना। सोचिये, उसके बारे में आपको जानकारी मिल गयी, वो जानकारी क्या है? विचार है। तो ये पता भी चल गया कि, हाँ इसके अलावा भी कोई सम्बन्ध होता है, तो बात वैचारिक रूप से यहाँ बैठ जाएगी, इतना ही होगा। सम्बन्ध ऐसी चीज़ नहीं होते हैं जिसमें आप वही रहे आएँ, जो आप हैं, और सम्बन्ध कुछ ख़ास हो जाए।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org