उम्र के साथ उलझनें बढ़ना!

उम्र के साथ उलझनें बढ़ना!

प्रश्न : सर, जैसे-जैसे बड़े होते जा रहे हैं, वैसे-वैसे उलझनें बढ़ती जा रही हैं। सर, पैसों की दिक्कत होया कुछ और प्रॉब्लम हो, जैसे-जैसे बड़े होते जा रहे हैं, परेशानियाँ और बढ़ती चली जा रही हैं। तो ऐसा क्या है, जो अब होने लगा है, जो पाँच साल पहले नहीं था? ऐसा क्या बदलाव आ गया है हमारे अन्दर कि हम मुश्किलों का सामना ही नहीं कर पाते?

वक्ता: (हँसते हुए) तुम होशियार होते जा रहे हो ज़्यादा, और कोई बात नहीं है!

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org