उमरिया धोखे में बीत गयो रे

उमरिया धोखे में खोये दियो रे

पाँच बरस का भोला भला, बीस में जवान भयो।

तीस बरस में माया के कारण, देश-विदेश गयो।

उमर सब धोखे में….

चालीस बरस अंत अब लागै, बाढ़ै मोह गयो।

धन धाम पत्र के कारण, निस दिन सोच भयो।।

बरस पचास कमर भई टेढ़ी, सोचत खाट परया।

--

--

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org