उनसे प्यार करने की हिम्मत है तुममें?

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी, प्रणाम! मेरा प्रश्न वृत्तियों के ऊपर है। गौतम बुद्ध कहते हैं कि वृत्तियों को बिना राग और द्वेष जगाए होशपूर्वक देखने मात्र से वृत्तियाँ क्षीण हो जाती हैं। परंतु मैं कितना भी प्रयास कर लूँ तब भी राग और द्वेष से निर्लिप्त नहीं हो पाता। इसका कारण खोजता हूँ तो पता हूँ कि इनसे जो मज़ा मिलता है, प्लेज़र मिलता है उन्हीं के पीछे ज़्यादा खिंचाव रहता है। ऊपर-ऊपर से तो मैं गौतम बुद्ध से प्रेम की बात करता हूँ लेकिन…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org