उड़ाना है तो उड़ाइए, पर पहले ज़रा कमाइए (उधार का फ़ेमिनिज़्म?)

प्रश्नकर्ता: मैं घूमती-फिरती हूँ, टूरिज़्म (पयर्टन) करती हूँ, अच्छे कपड़ों और ज्वेलरी (गहने) का शौक है मुझे। शॉपिंग (खरीदारी) करती हूँ। मुझे इस बात पर शर्मसार क्यों होना चाहिए? मेरे हसबैंड (पति) का बड़ा बिज़नेस (व्यवसाय) है। पेंटिंग, ट्रैवलिंग, ब्लॉगिंग मेरी हॉबी है और फ़ेमिनिज़्म मेरी आईडियोलॉजी (विचारधारा)। मैं आज की बोल्ड, कॉन्फिडेंट और आज़ाद लेडी (नारी) हूँ तो फिर मुझसे लोगों की क्यों जलती है?

आचार्य प्रशांत: बहुत अच्छी बात है आज़ाद ख्याल होना। आप कह रही हैं आप बोल्ड हैं, कॉन्फिडेंट हैं बहुत अच्छी बात है। आप शॉपिंग करती हैं…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org