उठो, अपनी हालत के खिलाफ़ विद्रोह करो!

तमसा का अर्थ होता है न सिर्फ आप एक गर्हित दशा में हैं, अपितु आपको उस दशा से अब कोई शिकायत भी नहीं रह गई है।

दो स्थितियाँ हो सकती हैं जहाँ पर आप बदलाव न चाहते हों।

पहली यह कि बुद्धत्व घटित ही हो गया, मंज़िल मिल गई, अब कहाँ जाना है? तो अब बदलाव का कोई सवाल नहीं पैदा होता है।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org