ईश्वर कैसे मिलेंगे?

ईश्वर कोई व्यक्ति तो है नहीं जो तुम्हारे सामने आकर खड़े हो जाएंगे। ईश्वर तुम्हारे ही भीतर की वो ताकत है जो तुम्हें सत्प्रेरणा देती है। ईश्वर ऐसे हैं जैसे अंधेरे जगत में दूर कहीं कोई रौशनी हो। ईश्वर लक्ष्य भी है और पथ प्रदर्शक भी है।

ईश्वर मंज़िल भी हैं और मंज़िल तक ले जाने वाला हमसफ़र भी है। किसी बाहरी ईश्वर पर विश्वास कर लेना फिजूल है। तुम्हारे ही मन के केंद्र का नाम ईश्वर है, तुम्हारे ही इरादों की सच्चाई का नाम ईश्वर है। जिस…

--

--

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org