‘ईश्वर का डर’ क्या है?

आचार्य प्रशांत: ‘भगवान का भय’, से क्या आशय होता है? समझना। एक भय होता है, जो संसार को न पाने का होता है। भय का अर्थ है, ‘कुछ छिन रहा है’। डर एक सोच है।

सभी श्रोतागण (एक साथ): कुछ खो जाने का डर।

आचार्य: एक भय होता है कि संसार छिन रहा है; और एक भय होता है कि ‘सत्य’ छिन रहा है। हैं दोनों भय ही। दोनों में यही लग रहा है कि कुछ छिन रहा है। ज़्यादातर हमें जो भय होता है, वो संसार के ही छिनने का होता है।…

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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