इसे कहते हैं असली जवानी

किताबी ज्ञान देने वाले तो हमेशा से बहुत रहे हैं। स्वामी विवेकानंद अनूठे हैं, उस आदर्श से जो उन्होनें जी कर प्रस्तुत किया। बहुत कम तुमने साधू-संत, सन्यासी देखे होंगें, जो इतने सुगठित सुडौल शरीर के हों जितने विवेकानन्द थे। खेल की, कसरत की, उनकी दिनचर्या में बंधी हुई जगह थी और यही नहीं कि वो व्यक्तिगत रूप से खेलते थे, अपने साथियों से भी कहें- “व्यायाम आवश्यक है।”

इस बात को समझना सूक्ष्म है। एक ओर तो शरीर को बना कर रखना है, दूसरी ओर शरीर से चिपक भी नहीं जाना है।

देह की सेवा बिलकुल करेंगें, और फिर देह से काम वासूलेंगें भाई, देह काम वसूलने के लिए है।

इस ढहते हुए देश के ढहते हुए अध्यात्म में स्वामी विवेकानंद ने ताकत भर दी।

उन्होंने जीवन में जो क्रांतिकारी आदर्श प्रस्तुत करा है, उसको देखिये। उनको एक स्वामी मात्र की तरह मत देखिये या उनको एक वक्ता या लेखक मात्र की तरह मत देखिये।

स्वामी विवेकानंद को आप बहुत ज़्यादा उनके कृतित्व से नहीं जान पायेंगे।

आपको उस इन्सान की ज़िन्दगी को देखना पड़ेगा। बड़ा खूबसूरत जवान आदमी था और जब आप उसकी ज़िंदगी के करीब जा कर के देखेंगे, प्यार हो जाएगा आपको। बिलकुल मुरीद हो जायेंगें, फैन क्योंकि योग इत्यादि की बातें तो बहुतों ने करी। स्वामी विवेकानंद ने भी करी। आज भी न जाने कितने लोग कर रहे हैं। बातों की हिन्दुस्तान में कब कमी रही है, बातें करने वाले तो बहुत हैं, कर के दिखाने वाले लोग कम रहे हैं। उन्होनें कर के दिखाया। उन्होनें खुद आगे खड़े हो करके आदर्श प्रस्तुत किया और बिलकुल नए प्रकार का आदर्श।

उन्होनें अध्यात्म को ज़मीन पर उतार दिया, सड़क पर उतार दिया; भारत की नहीं, अमेरिका की सड़क पर उतार दिया।

विवेकानंद को रामकृष्ण मिले थे, उस ज़रिये से उनके जीवन में ज्ञान उतरा था।

आपके जीवन में किसी भी तरह से अगर ज्ञान उतरा है, तो ज्ञान के बाद फिर मिशन चाहिए।

अगर रामकृष्ण गुरु मिले हैं तो फिर रामकृष्ण मिशन आयेगा ही आयेगा। आप बताइए, अगर आपको भी कहीं से गुरुता से संपर्क मिला है, तो फिर मिशन कहाँ है? काम कहाँ है?

मैं बार-बार कहता हूँ, मुझे मत बताओ तुम्हें पता क्या है, मुझे दिखाओ, तुम जी कैसे रहे हो।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org