इन्हें पसंद नहीं हैं मेरे राम

राम आज ज़्यादातर लोगों को क्यों पसंद आएँगे? देखो हर युग, उस युग के मूल्यों के हिसाब से अपने आदर्शों को, नायकों को चुनता है। चुनता भी है, गढ़ता भी है। तो जिस युग के जो मूल्य होते हैं, जो वैल्यूज़ होती हैं उसी के हिसाब से उस युग के प्रचलित आदर्श हो जाते हैं।

आज के युग का सबसे बड़ा आदर्श है- भोग, कंज़म्पशन। खाओ! खाओ! खाओ! भोगो! भोगो! भोगो! तो इस युग को फिर ऐसे ही चरित्र, लोग, आदर्श, नायक पसंद आएँगे, जिन्होंने अपनी…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org