आपको वहीं भेजता हूँ जहाँ खुद गया हूँ

मन और जीवन के जो विशेषज्ञ हुए हैं उनके पावों में जाकर बैठा हूँ। खेद की बात ये है कि ऐसा कोई जीवित है नहीं या मिला नहीं तो मुझे बस इतनी ही सुविधा थी कि जो हो गए अतीत में उनके शब्दों के पास जाकर बैठ जाऊं, उनकी वाणी सुन लूँ, उनके ग्रंथ पढ़ लूँ।

वो मैंने किया है इसीलिए आपको बड़े अधिकार और विश्वास के साथ कहता हूँ कि आप भी करिए। वो मैंने करा ही नहीं है, वो मैं आज भी करता हूँ।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org