आनंद हो संबंधों का आधार

बात सुनने में थोड़ी अजीब लगेगी, पर ध्यान दोगे तभी समझ आएगी। ध्यान नहीं दोगे, तो कहोगे, “सर आप बड़ी विपरीत बात कर रहे हैं।”

जिसने अपने अकेलेपन में खुश रहना सीख लिया, सिर्फ़ वही पार्टी (उत्सव) में मज़े कर सकता है। जो अकेले भी खुश है, सिर्फ़ वही पार्टी में भी खुश रह पाएगा। और जो अपने अकेलेपन में दुखी है, और पार्टी में इसीलिए जा रहा है ताकि वहाँ अपना अकेलापन मिटा सके, तो वो पार्टी में भी तन्हा ही रहेगा।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org