आध्यात्मिक साधना में वस्त्र आदि का महत्व

हर वो चीज़, जो तुमको तुम्हारे नियमित जगत से आगे की याद दिलाती हो, उपयोगी है।

मन का बड़ा स्वार्थ है ये मानने में कि जो दुनिया उसने अपने लिए रच ली है, वो दुनिया ही सत्य है। आवश्यक होता है मन को निरंतर यह अहसास देते रहना, ज़रा चोट देते रहना कि — तुम्हारी दुनिया से आगे भी एक दुनिया है, और न सिर्फ़ तुम्हारी दुनिया से अलग है, बल्कि तुम्हारी दुनिया से ऊँची है, श्रेष्ठ है।

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org