आत्मा न हो तो शरीर से कौन प्रेम करेगा?

आत्मा का आत्मा से संबंध, इसी का नाम है प्रेम। और आत्मा का आत्मा से और कोई संबंध होता नहीं, प्रेम के अतिरिक्त। और प्रेम आत्मा और आत्मा के संबंध के अतिरिक्त कुछ हो नहीं सकता। मन का मन से संबंध प्रेम नहीं, शरीर का शरीर से संबंध प्रेम नहीं, और कोई भी संबंध प्रेम नहीं। इसका अर्थ ये है कि अगर प्रेम की अभीप्सा उठती है मन में तो इतना निश्चय जान लीजिए कि बिना आत्म बोध के वो आपको नहीं मिलेगा।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org