आज दुनिया में अधर्म इतना बढ़ा हुआ क्यों है?

इंसान ने आज तक जो कुछ भी करा, जाना, समझा, उसका कुल मिला-जुला कर नतीजा यह हुआ है कि आज हम महाविनाश पर खड़े हुए हैं।

कुछ ऐसा चाहिए जो बिल्कुल नया हो, एकदम अपूर्व हो।

अगर हम कुछ ऐसा कर रहे हैं जो पुराने ही जैसा है तो पुराने का नतीजा क्या निकला वो तो देख ही रहे हैं। कुछ एकदम मौलिक खड़ा करने की ज़रूरत है। कुछ एकदम ही नया करने की ज़रूरत है।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org