आज की दुनिया में कौन से काम करने लायक हैं?

प्रश्नकर्ता: प्रणाम आचार्य जी! पिछले दो दिनों में मैंने सफलता और व्यवसाय के ही विषय में आपसे जिज्ञासा की। आपको सुन रहा हूँ, गुन रहा हूँ। चाहता हूँ कि जो व्यवसाय करूँ उसमें आपसे सुने वक्तव्यों की सुगंध मौजूद हो। आज की अर्थव्यवस्था को देखते हुए, बाज़ार को मद्देनजर रखते हुए मुझे कौन से एथिक्स (नैतिकताएँ) और प्रिंसिपल्स (सिद्धांतों) को लेकर अपने व्यवसाय में उतरना चाहिए ताकि कुकर्म ना हो, देश, समाज का भला हो और व्यापार में भी समृद्धि मिले?

आचार्य प्रशांत: सबसे पहले तो तुम्हें ये पता होना चाहिए कि कौन से ऐसे काम हैं जो बिलकुल नहीं करने हैं। जो भी काम, जो भी व्यवसाय, जो भी उद्योग, इंडस्ट्री चलती ही आदमी की कमज़ोरी पर हो, फलती-फूलती ही आदमी की पशुता और आदमी की असुरक्षा से हो, उससे दूर रहना है। ऐसे समझ लो कि ऐसे कौन से काम हैं उनकी एक सूची बना लो, जिनमें मुनाफा बढ़ता ही जाता है आदमी जितना गिरता जाता है। उन कामों से सबसे पहले कह दो कि, "माफ करिएगा, आपको स्पर्श नहीं करूँगा।"

बहुत सारे ऐसे व्यवसाय हैं जिनमें ज़बरदस्त मुनाफा होगा तुम्हें, जितना तुम आदमी को गिरा हुआ पाओगे। आदमी गिरता जाएगा, उन व्यवसायों में मुनाफा बढ़ता जाएगा। वो व्यवसाय फलेंगे-फूलेंगे ही ऐसी जगहों पर जहाँ पर आदमी का मन सबसे ज़्यादा मैला, हिंसक, विकृत हो। उनसे बचना। ऐसी हर जगह से बचना जहाँ डर मुनाफे का कारण बनता हो, जहाँ हिंसा मुनाफे का कारण बनती हो, जहाँ रोग मुनाफे का कारण बनता हो, जहाँ आदमी का लालच मुनाफे का कारण बनता हो। जहाँ आदमी को भ्रमित करके मुनाफा कमाया जाता हो, ऐसे सब उद्योगों से बचना।

तो फिर करें क्या? देखो कि आज दुनिया जहाँ खड़ी है — मैं बाज़ार की बात नहीं कर रहा, मैं दुनिया की बात कर रहा हूँ — आज दुनिया जहाँ खड़ी है वहाँ किस काम की ज़रूरत है। ऐसा काम जिसको करते हुए तुम्हें साफ पता हो कि मुनाफा हो ना हो, ये काम ज़रूरी है, ये काम होना चाहिए।

उस काम का बहुत संभव है कि कोई बाज़ार ना हो। उस काम का बहुत संभव है कि कोई इंडस्ट्री, कोई मार्केट ना हो, लेकिन वो काम ज़रूरी है न, तो तुम करो। और ये यकीन रखो कि अगर वो काम करना ज़रूरी है तो उसमें से तुम्हारे रोटी-कपड़े का इंतजाम हो जाएगा; मकान का मैं नहीं कहता, किराए पर रह लेना। रोटी कपड़े भर का इंतजाम हो जाएगा, तुम सही काम चुनो।

और अगर तुमने सही काम चुना है तो ये भी भरोसा रखो दिल में कि तुम अकेले ही नहीं हो दुनिया में जो सही काम को सही जानते हो। सही काम को सही जानने वाले लोग निश्चित रूप से अल्पमत में हैं, निश्चित रूप से बहुत कम हैं, निश्चित रूप से शून्य-दशमलव-एक प्रतिशत हों शायद लेकिन भाई आठ-सौ करोड़ लोगों का शून्य दशमलव एक प्रतिशत भी बहुत होता है।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org