आओ भूत दिखाएँ

प्रश्नकर्ता: मेरा एक दोस्त है वो ये भूत-प्रेत वगैरह सब में बहुत ज़्यादा विश्वास करता है। हालाँकि पढ़ा-लिखा है वेल एजुकेटेड है लेकिन पता नहीं क्यों ऐसा है। तो बहुत उससे डिस्कशन (चर्चा) हुआ, काफ़ी सारे लॉजिक (तर्क) उसने भी दिए। मैंने कहा — भई मैंने तो कभी नहीं देखे, अगर होते तो मुझे भी दिखते। तो फिर वह बोलता है कि तुमने नहीं देखे तो इसका मतलब ये थोड़े ही है कि नहीं होते हैं, क्या पता तुमको बाद में दिख जाए। तो मतलब इसका मुझे लग रहा था कि बात तो ग़लत है लेकिन मैं कोई…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org