अमर होने का तरीका

प्रश्नकर्ता: आचार्य जी प्रणाम, हमारी शारीरिक मृत्यु तो होगी ही पर क्या मन की सारी कामनाओं का खत्म होना ही अमरता है?

आचार्य प्रशांत: हम ग़लत चीज़ के साथ कामना जोड़ना बंद कर देंगे। मान लीजिए मेरे गले में प्यास उठी और मैंने ये कागज़ चबाया, थोड़ी देर में फिर प्यास उठी और मैं कलम चबा गया, थोड़ी देर में फिर प्यास उठी मैं माइक को चबाने लग गया, और मैं कर क्या नहीं रहा हूँ? पानी नहीं पी रहा हूँ।

कामना क्या है? कामना में दो चीज़ें होती हैं — एक कामना करने वाला जिसे हम बोलते हैं अह्म, दूसरा कामना का विषय। भाई जो कामना कर रहा है उस बेचारे को क्या दोष दें? उसका अपने बारे में विचार ही यही…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org