अपने विचारों को आज़ादी दो

हम सब ये मानना शुरू कर देते हैं कि विचार जैसे कोई बड़ा दुर्गुण है। विचार अपराध वगैरह नहीं है। विचार आपके लिए आवश्यक है। ज़्यादातर लोगों की समस्या ये नहीं है कि उनको निर्विचार उपलब्ध नहीं हो रहा, ज़्यादातर लोगों की समस्या ये है कि उनको विचार ही नहीं उपलब्ध हो रहा। सोच से मुक्ति बहुत दूर की कौड़ी है। अधिकांश लोग ठीक से सोच ही नहीं पाते। इसीलिए विचारक का दर्ज़ा आम आदमी से ऊपर का होता है।

--

--

--

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

Love podcasts or audiobooks? Learn on the go with our new app.

Get the Medium app

A button that says 'Download on the App Store', and if clicked it will lead you to the iOS App store
A button that says 'Get it on, Google Play', and if clicked it will lead you to the Google Play store
आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

More from Medium

Glimpses of life

Oneness

Let’s Challenge Our Students Not Define Them

‘The Last Thing on My Mind’

Colored stacked of balancing rocks against a distant out-of-focused background in fall’s outdoor colors.