अपने भीतर बैठे दुश्मन को कब पहचानोगे?

जब तुम कहते हो सब आदमी एक बराबर हैं तो यह कह कर के तुम लोगों की मदद नहीं कर रहे बल्कि ये कह कर तुम गिरे हुए आदमी को न उठने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हो। तुम उससे कह रहे हो कि तुम गिरे हुए हो तो भी क्या फर्क पड़ता है तुम अभी भी बुद्ध के बराबर हो, तुम और बुद्ध एक समान हो, सब इंसान बराबर हैं एक दूसरे के।

अपनी खोट नहीं देखनी है क्योंकि अपनी खोट देखी तो अपनी निचाई माननी पड़ेगी। जिस आदमी को अपनी खोट नहीं…

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रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

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