अपने जीवन में श्रीकृष्ण के दर्शन कैसे हों?

जो सत्य की खिलाफत कर लेता हो उसमें बड़ा आत्मविश्वास होगा। ये विनम्रता झूठी है, तुम यूँ ही झूठ-मूठ अभी मुझे कह रहे हो कि ये आँखे झूठी हैं और साहस कम है और डर लगता है और आदतों का गुलाम हूँ। ऐसा कुछ भी नहीं है।

बहुत बड़ी तोप है सत्य, उसका तुम मुकाबला कर रहे हो लगातार, वो भी सफलतापूर्वक, तो सोचो तुम कितनी बड़ी तोप हो। जो सत्य के खिलाफ खड़ा हो सोचो वो अपने आपको क्या समझता होगा? वो तो सूरमाओं का सूरमा है। तुम किसके खिलाफ खड़े हो लिए, सच के खिलाफ।

सत्य जिसे दिख जाता है वो उसका गुलाम बन जाता है। उसके बाद तुम ये नहीं कह सकते कि मुझे दिखता तो है पर मैं उस पर चलता नहीं हूँ। अगर चल नहीं रहे हो तो इसका मतलब दिखता नहीं है।

अपनी नज़रों में हम ही सबसे बड़े हैं, हमारे लिए कोई ऊँचा नहीं।

कृष्ण के दर्शन की अभीप्सा मत बताओ, बहुत बड़ी बात है और असंभव भी, कृष्ण का कोई दर्शन नहीं होता। कृष्ण का दर्शन अगर अहंकार ने कर लिया तो वो और फूल के कुप्पा हो जाएगा। कहेगा जानते हो मैं कौन हूँ, कहेगा अभी-अभी मैं कृष्ण के दर्शन करने आया हूँ।

कृष्ण के दर्शन नहीं किए जाते, कृष्ण का उपकार हो, कृष्ण का वरदान हो, तो माया के दर्शन होते हैं। माया का तो दर्शन कर लो पहले।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org

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