अपनी योग्यता जाननी हो तो अपनी हस्ती की परीक्षा लो

आध्यात्मिक पथ पर जो आदमी लगा है वो बड़ी से बड़ी भूल ये कर सकता है कि वो कहे कि मैं तो आम लोगों जैसा ही दिखूँगा क्योंकि आम लोगों जैसा दिखने में, भीड़ का हिस्सा होने में सुरक्षा लगती है। “मैं ये नहीं दिखाऊँगा कि मैं अलग हो गया हूँ। मैं दो नावों पर एक-एक पाँव रखकर यात्रा करूँगा। मैं पचास-पचास खेलूँगा। मैं जब बाज़ार में रहूँगा तो मैं ऐसे कपड़े पहन लूँगा कि लगे कि मैं बिलकुल बाज़ार का ही हूँ। मैं दफ़्तर में…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org