अपनी बेसब्री की वजह जानते हो?

दुर्जन कौन? जो संसार को ही आख़िरी सत्य मान ले।

वो टूटेगा, उसका टूटना पक्का है, क्योंकि तुमने जिस चीज़ को पकड़ा है वो चीज़ तो जायेगी ही। तुमने जहाँ घर बनाया है, वो एक दलदल है, वो घर डूब के रहेगा, और हर घर दलदल पर ही बनता है। कोई घर ऐसा नहीं जो डूब के न रहता हो।

दुर्जन कौन है? दुर्जन वो जो खुद तैयार कर रहा है अपनेआप को धक्का खाने के लिए, चोट पाने के लिए। “मैंने खूब जोड़ लिया अपनेआप को अपने पति से”, अब इसने पूरी तैयारी कर ली है धक्का खाने की। इसकी पूरी दुनिया क्या है? इसका पति। इतनी ज़ोर की दरार लगेगी क्योंकि पति तो जाएगा, और जाने का अर्थ सिर्फ़ यही नहीं है कि मर जाएगा — देहावसान। पति माने पति की छवि, और वो टूटेगी, क्योंकि हर छवि को टूटना ही है — एकही धक्का दरार”।

अधीरजन, दुर्जन ये सब कौन हैं? ये वो हैं जिन्होंने ऐसे से नाता बना लिया है जो हवा-हवाई हैं, जिनका जाना पक्का है।

जिसका जाना पक्का है तुमने उसके साथ ही सब जोड़ दिया तो तुम टूटोगे।

साधु जन कौन है? साधु जन वो है जिसने वहाँ घर बनाया है जहाँ आने-जाने का कोई सवाल नहीं पैदा होता। तुम उसका घर उजाड़ ही नहीं सकते। तुम जितनी बार उसका घर उजाड़ोगे उतनी बार तुम पाओगे कि वो बना ही रखा है, वैसे ही जैसे पानी पर लाठी मारी हो। तुम समुद्र पर लाठियाँ मारोगे तो क्या होगा? कुछ भी नहीं, मारते रहो वो टूटेगा नहीं। “हम वहाँ रहते हैं जहाँ हमारे घर को कोई छू नहीं सकता, खराब नहीं कर सकता।” तुम नहीं भेज पाओगे, कि जा करके इसका घर गिरा दो।

अगर तुम जुड गए हो ईंट-पत्थर के घर से, तो ये घर तो गिरेगा, पक्का गिरेगा। और खूब दुःख पाओगे। तुमने अपने दुःख की पूरी तैयारी कर ली है।

अन्तर समझ में आ रहा है?

साधु को दुःख क्यों नहीं मिलेगा?

क्योंकि वो नित्य में वास करता है।

क्योंकि वो उससे जुड़ा हुआ है जिसको संसार स्पर्श भी नहीं कर सकता।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org