अपनी प्रतिभा का कैसे पता करूँ?

एक ख़ास किस्म का संगीत अगर तुमको आता है, अगर तुम्हें उसमें पारंगत हासिल है, तो तुम एक देश में बड़े संगीतज्ञ बन जाओगे, दूसरे देश में जहाँ पर उस तरह के संगीत को कोई स्वीकृति नहीं है, वहाँ पर तुममें कोई गुण नहीं देखा जायेगा कि तुम्हें कुछ आता है।

तो प्रतिभा तो समाज की एक धारणा है। समाज सिर्फ उन योग्यताओं को प्रतिभा का नाम देता है जो उसके काम की हों, जो कुछ समाज के काम का है, समाज कह देगा यह प्रतिभा है, और यह…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org