अध्यात्म है शरीर से स्वस्थ सम्बन्ध, और स्वस्थ दूरी

अध्यात्म है मानव का अपनी उच्चतम संभावना को और पूर्ण अभिव्यक्ति को प्राप्त होना। जाहिर सी बात है कि अध्यात्म शरीर को सुखाने की, निष्प्राण करने की या निर्बल करने की कला नहीं है।

हाँ, यह ज़रूर हो सकता है कि आध्यात्मिक आदमी किसी ऐसे महत और दुष्कर उपक्रम में लग जाए जिसमें उसके शरीर पर चोट ही चोट पहुँचे और इस कारण से वह क्षीणकाय नज़र आए। वो बात दूसरी है।

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org