अतीत को भूल क्यों नहीं पाते हैं?

आचार्य प्रशांत: देवेन्द्र ने कहा कि अतीत हावी होने लगता है, स्मृतियाँ आक्रमण करने लगतीं हैं। देवेन्द्र ये बताओ, अतीत कहाँ है? तुम बैठे हुए हो अतीत कहाँ हैं? कहाँ है अतीत? जो है सो अभी है, प्रस्तुत है। अतीत कहाँ है?

अतीत आक्रमण नहीं करता तुम अतीत को आमंत्रित करते हो। कहीं ना कहीं उसको बुला करके तुम्हें सुख मिलता है अन्यथा अतीत अपने आप नहीं घुसा चला आएगा, बिन बुलाया मेहमान। अभी यहाँ हम बैठै हुए हैं देवेन्द्र…

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आचार्य प्रशान्त - Acharya Prashant

रचनाकार, वक्ता, वेदांत मर्मज्ञ, IIT-IIM अलुमनस व पूर्व सिविल सेवा अधिकारी | acharyaprashant.org